पिरान कलियर

कलियर नगर पंचायत में अलाव की लकड़ी की चोरी के आरोप, वीडियो में कर्मचारी लकड़ी देते दिखे

पिरान कलियर नगर पंचायत में अलाव की लकड़ी की चोरी के आरोप, वीडियो में कर्मचारी लकड़ी देते दिखे

उत्तराखंड ,,सच्ची घटना 24✍️✍️✍️✍️✍️

पंडित ,जावेद साबिर ✍️✍️✍️✍️✍️✍️

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पिरान कलियर नगर पंचायत सर्दी के मौसम में आम जनता को राहत देने के लिए नगर पंचायत द्वारा गली-मोहल्लों में जलाए जाने वाले अलाव की व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कलियर नगर पंचायत क्षेत्र में अलाव की लकड़ी की चोरी और मनमाने वितरण के आरोप सामने आए हैं। सूत्रों का कहना,,स्थानीय लोगों का कहना है कि अलाव के लिए आने वाली लकड़ी जरूरतमंद जगहों पर न पहुँचकर अपनी जान-पहचान वालों को दी जा रही है, और बेची जा रही है बकि कई प्रमुख स्थान पूरी तरह नजर अंदाज किए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, जहाँ-जहाँ अलाव की जरूरत है वहाँ लकड़ी नहीं पहुँच रही, जबकि कुछ चुनिंदा जगहों पर नाम मात्र की लकड़ी डाल दी जाती है, जो 30 से 45 मिनट में ही खत्म हो जाती है, जबकि सर्दी के प्रकोप को देखते हुए अलाव कम से कम 2 से 3 घंटे तक जलना चाहिए।

वीडियो में कर्मचारी लकड़ी बांटते दिखे

इस पूरे मामले में ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें कलियर नगर पंचायत के कर्मचारी अलाव की लकड़ी अन्य लोगों को देते हुए दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि यह लकड़ी अलाव के लिए निर्धारित थी, लेकिन उसे दूसरी जगहों पर बाँट दिया गया।

पहले से कम कर दी गई अलाव की जगहें

नगर पंचायत की जनता का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार अलाव की जगहों की संख्या काफी कम कर दी गई है। कई मुख्य और भीड़भाड़ वाले स्थानों को पूरी तरह छोड़ दिया गया है, जिससे गरीब, मजदूर और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अधिशासी अधिकारी ने दी सफाई

जब इस संबंध में कलियर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी कुलदीप चौहान से बात की गई, तो उन्होंने आरोपों को नकारते हुए कहा:,,ऐसा नहीं हो रहा है। अगर कहीं इस तरह की कोई शिकायत सामने आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।” अब उठ रहे हैं बड़े सवाल ,अब सवाल यह उठता है कि जब वीडियो मौजूद हैं, तो क्या कार्रवाई होगी। अलाव की लकड़ी का वितरण आखिर किसके आदेश पर हो रहा है?

क्या नगर पंचायत की अलाव व्यवस्था सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है?

नगर पंचायत की इस व्यवस्था पर अब जनता की नजरें टिकी हैं और लोग मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सर्दी में जरूरतमंदों को सही मायनों में राहत मिल सके।

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