पिरान कलियर

6 साल की समायरा बहन सारा मासूम बच्ची ने इस रमज़ान में रखा पहला रोज़ा

6 साल की समायरा बहन सारा दोनों मासूम बच्ची ने इस रमज़ान में रखा पहला रोज़

 

उत्तराखंड,, सच्ची घटना 24✍️✍️✍️✍️✍️✍️

पंडित ,,,जावेद साबिर✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

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पिरान कलियर,,रमज़ान के मुबारक महीने में जहां बड़े-बुज़ुर्ग इबादत और रोज़ों में मशगूल हैं, वहीं छोटे-छोटे बच्चे भी इस पाक महीने की अहमियत को समझते हुए इबादत की राह पर कदम बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में रुड़की की 5 साल की मासूम बच्ची समायरा व सारा, पुत्री नदीम एडवोकेट, बच्चों ने इस रमज़ान अपना पहला रोज़ा रखकर परिवार और क्षेत्रवासियों का दिल जीत लिया। इतनी कम उम्र में रोज़ा रखने को लेकर समायरा ,सारा परी में खासा उत्साह देखने को मिला। परिवार वालों के अनुसार समायरा व सारा ने सहरी के समय बड़े शौक और खुशी के साथ सहरी की और पूरे दिन रोज़ा रखने की कोशिश की। पूरे दिन वह खुशमिजाज रही और अल्लाह की इबादत के साथ-साथ रोज़े की अहमियत को भी समझती नजर आई। इफ्तार के समय जब रोज़ा खोला गया तो घर में खुशी का माहौल देखने को मिला। परिवार के लोगों ने समायरा,सारा परी की हौसला अफजाई की और उसे ढेरों दुआएं दीं। इस खास मौके पर घर में इफ्तार की विशेष तैयारी की गई और परिजनों ने बच्ची के इस जज़्बे की सराहना की। परिवार के सदस्यों का कहना है कि बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना चाहिए, ताकि उनमें इबादत और इंसानियत की भावना मजबूत हो सके। समायरा ,सारा परी के पहले रोज़े की खबर सुनकर आसपास के लोग और रिश्तेदार भी उसे मुबारकबाद देने पहुंचे और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआएं की । मासूम समायरा , सारा के इस छोटे से लेकिन प्रेरणादायक कदम की क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है और लोग उसके जज़्बे की सराहना कर रहे हैं। रमज़ान के इस पवित्र महीने में एक छोटी बच्ची का पहला रोज़ा सभी के लिए खुशी और प्रेरणा का कारण बन गया।

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