पिरान कलियर काले सोने का कारोबार, काला सोना है क्या और कलियर क्यों चर्चा मे,,

पिरान कलियर काले सोने का कारोबार, काला सोना है क्या, और कलियर क्यों चर्चा मे,,,

उत्तराखंड,, सच्ची घटना 24 ✍️ ✍️ ✍️ ✍️
पंडित ,,जावेद साबिर कलियर ✍️ ✍️ ✍️ ✍️
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पिरान कलियर को लोग आस्था नगरी और विश्व प्रसिद्ध पांचवें धाम दरगाह साबिर पाक के नाम से जानते हैं।आस्था नगरी पर नशे का साया” काला सोना’ क्या है और कलियर में क्यों चर्चा बीते कुछ समय से यहाँ ‘काले सोने शब्द सरेआम गूंज रहा है। स्थानीय लोग ‘काले सोने नाम से चरस, गांजा और भांग के अवैध कारोबार को जानते हैं। सूत्रों के मुताबिक दरगाह क्षेत्र में ये नशीले पदार्थ 100 रुपये से शुरू होकर खुलेआम बिक रहे हैं। आस्था के नाम पर आने वाले जायरीनों के बीच इस कारोबार का तेजी से फैलना चिंता का विषय बन गया है

रात के अंधेरे में खेल – नुक्कड़ों पर बिकता नशा शिकायत है कि दिन के समय भले ही भीड़ की वजह से कारोबार दबा रहे, लेकिन रात होते ही दरगाह क्षेत्र के अलग-अलग नुक्कड़ों और गलियों में नशे का कारोबार अपने चरम पर पहुंच जाता है। स्थानीय लोगों और जायरीनों का आरोप है कि यहाँ चरस-गांजा बेचने और पीने वाले आसानी से देखे जा सकते हैं। बाहरी क्षेत्रों से आने वाले संदिग्ध व्यक्ति भी यहाँ अपना नेटवर्क चला रहे हैं। नशे की इस सुलभता की वजह से पूरा क्षेत्र संदिग्ध गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है। पकड़े जाते हैं नशा तस्कर रुकते नहीं ,,पुलिस रिकॉर्ड देखें तो क्षेत्र में आए दिन कोई न कोई नशा तस्कर पकड़ा जाता है। स्मैक, चरस और गांजा के साथ गिरफ्तारियां भी होती हैं। बावजूद इसके तस्करों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “दिन हो या रात, नशा तस्करों की बल्ले-बल्ले है।” आस्था के केंद्र का इस्तेमाल कर , इस करोड़ों के अवैध धंधे पर पूरी तरह अंकुश न लग पाना सबसे बड़ा सवाल है । पुलिस की कार्रवाई और चुनौती कलियर पुलिस समय-समय पर छापेमारी कर नशे के कारोबारियों पर कार्रवाई करती रहती है। कई तस्कर जेल भी जा चुके हैं। लेकिन पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पकड़-धकड़ के बाद भी ये नेटवर्क तुरंत दोबारा एक्टिव हो जाता है। आस्था के कारण यहाँ देश-विदेश से आने वाली भीड़ तस्करों को अपनी पहचान छिपाने में मदद कर देती है। स्थानीय निवासियों और दरगाह आने वाले जायरीनों की एक ही मांग है कि आस्था के इस केंद्र को नशे के दाग से बचाया जाए। लोगों का कहना है कि रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और संदिग्धों की सख्ती से चेकिंग की जाए। साथ ही CCTV और ड्रोन निगरानी से उन नुक्कड़ों पर नजर रखी जाए जहाँ ये गतिविधियां सबसे ज्यादा होती हैं। ताकि दरगाह पर आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल मिल सके।



