उत्तराखंड

सांप्रदायिक सौहार्द की एक ऐसी मिसाल की, जिसने पूरे क्षेत्र का दिल जीत लिया

सांप्रदायिक सौहार्द की एक ऐसी मिसाल की, जिसने पूरे क्षेत्र का दिल जीत लिया 

उत्तराखंड,, सच्ची घटना 24✍️✍️✍️✍️✍️

पंडित,,जावेद साबिर ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

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पीरपुरा गांव में भंडारे का दृश्य, लोग प्रसाद ग्रहण करते हुए, भजन गाते हुए, इंतजार प्रधान लोगों से बातचीत करते हुऐ  विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पीरपुरा में संत शिरोमणि रविदास जयंती का पर्व इस बार बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के जाने-माने समाजसेवी और सुराज सेवा दल के वरिष्ठ नेता, इंतजार प्रधान ने एक विशाल भंडारे का आयोजन कर भाईचारे की अद्भुत मिसाल पेश की है।

, महिलाओं और बुजुर्गों की उपस्थिति

कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ ने न केवल श्रद्धाभाव से प्रसाद ग्रहण किया, बल्कि समाज में एकता का एक सशक्त संदेश भी दिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को एक साथ लाना और आपसी प्रेम को बढ़ावा देना था। रविदास जी ने हमेशा मानवता, प्रेम और समानता का संदेश दिया है। उनके विचार किसी एक जाति या धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए हैं। हम सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज से भेदभाव मिटाने का संकल्प लेना चाहिए। इस भंडारे का मकसद यही है कि हम सब मिलकर रहें।

प्रधान की तारीफ करते हुए, हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक बनते हुए

 

ग्रामीणों ने इंतजार प्रधान की इस पहल की जमकर सराहना की। उनका कहना था कि इंतजार प्रधान हमेशा से ही गांव में एकता बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहते हैं। रविदास जयंती पर उनके द्वारा आयोजित यह भंडारा इस बात का प्रमाण है कि पीरपुरा में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा अटूट है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भी आपसी मेलजोल की प्रेरणा मिलती है।रविदास जी के भजनों पर भक्तिमय माहौल, भजन मंडली भंडारे में बड़ी संख्या में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने शिरकत की। इस दौरान रविदास जी के भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। यह आयोजन वास्तव में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी तस्वीर पेश करता है। तो देखा आपने, कैसे एक छोटी सी पहल समाज में बड़े बदलाव ला सकती है। हमें इंतजार प्रधान जैसे और लोगों की ज़रूरत है, जो प्रेम और भाईचारे का संदेश फैला सकें।

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