पिरान कलियर

कलियर में मेडिकल स्टोर की आड़ में मौत का खेल – जनता जाए तो कहां जाए,,

कलियर में मेडिकल स्टोर की आड़ में मौत का खेल – जनता जाए तो कहां जाए,,

उत्तराखंड सच्ची घटना ,24 न्यूज़✍️✍️✍️

पंडित जावेद साबिर,✍️✍️✍️✍️✍️✍️

पिरान कलियर में एक बार फिर वही सवाल खड़ा हो गया है आखिर कई सालों से मेडिकल स्टोर पर नशे के सौदागर क्यों पकड़े जा रहे हैं? और इन पर बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं होती? जनता दवा लेने जाए तो कहां जाए, जब दवा के नाम पर ही नशा परोसा जा रहा हो। कलियर पुलिस और STF ने संयुक्त कार्रवाई में इस मौत के खेल का पर्दाफाश किया है।

मेडिकल स्टोर की आड़ में नशे का काला कारोबार,,

तारीख 15 सितंबर 2026, जगह -सोहलपुर रोडसाबरी नावेद टी स्टाल के सामने स्थित मोनी मेडिकल स्टोर, पिरान कलियर। STF इंस्पेक्टर भवानी शंकर पंत को सूचना मिली थी कि यहां दवाओं के नाम पर नशे का अवैध धंधा चल रहा है। सूचना पर ड्रग इंस्पेक्टर विनोद जगुड़ी, हरीश सिंह और कलियर कोतवाली पुलिस के साथ टीम ने जाल बिछाया और स्टोर पर छापा मारा। लेबल हटाकर बेचते थे मौत की पुड़िया – पुलिस ने बिछाया जाल,, दुकान पर मौजूद दो लोग – कुर्बान अली पुत्र अब्दुल मजीद उम्र 40 वर्ष निवासी महमूदपुर और आदिल पुत्र जिन्दा हसन निवासी मुकरपुर, उम्र 24 वर्ष से पूछताछ हुई। काउंटर के ऊपरी रैंक की तलाशी ली गई तो होश उड़ाने वाला सच सामने आया।

कलियर पुलिस की बड़ी कामयाबी बरामद हुआ समान,, 10 शीशी Codectus TR सिरप – जिसमें Codeine Phosphate जैसा नशीला पदार्थ है- कुल 1150 नशीले कैप्सूल Puroxiwin Spas – जो असल में Tramadol कैप्सूल हैं। खास बात ये है कि पकड़े जाने के डर से आरोपी इन कैप्सूल की मूल पैकिंग और लेबल हटाकर 4 पारदर्शी सिल्वर पन्नियों में 860 और 290 लूज कैप्सूल के रूप में बेच रहे थे। मोटे मुनाफे के लिए युवाओं को नशे की दलदल में धकेला, पूछताछ में दोनों तस्करों ने खुद कबूला – “साहब हमारे पास कोई खरीद-बिक्री का बिल नहीं है, न ही कोई डॉक्टर का पर्चा। हम मोटा मुनाफा कमाने के लिए नशे के आदी लोगों को ये लूज कैप्सूल बेचते हैं।” मतलब साफ है, जनता की सेहत के नाम पर चल रहा था मौत का सौदा। आखिर हर साल वही कहानी, बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं, ये पहला मामला नहीं है। कलियर में हर साल मेडिकल स्टोरों पर नशे के सौदागर पकड़े जाते हैं, फिर भी ये धंधा रुकता नहीं। बड़ा सवाल यही है कि आखिर इनके पीछे का नेटवर्क कौन चला रहा है? क्या सिर्फ 2 लोगों की गिरफ्तारी से इस जड़ को खत्म किया जा सकता है? कब होगी इन पर ऐसी बड़ी कार्रवाई कि दोबारा कोई मेडिकल स्टोर को नशे का अड्डा बनाने की हिम्मत न करे? पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना कलियर में मु0अ0सं0 212/2026 धारा 8/22/29 NDPS एक्ट में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश कर दिया है। कलियर पुलिस और STF की इस कार्रवाई ने एक बार फिर सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेडिकल स्टोर, जो जीवन बचाने के लिए होते हैं, अगर वहीं मौत परोसी जाएगी तो जनता आखिर जाए तो कहां जाए।

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